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एकादशी कैलेंडर 2026

भगवान विष्णु की भक्ति में व्रत का पवित्र दिन

🙏 अगली एकादशी

पौष पुत्रदा एकादशी
29 जनवरी 2026
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सेकंड

पक्ष

शुक्ल पक्ष

माह

पौष

व्रत प्रारंभ

सूर्योदय से

व्रत समाप्ति

द्वादशी पारण समय

महत्व

इस एकादशी का व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और परिवार में समृद्धि आती है।

📅 2026 की सभी एकादशी

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकादशी व्रत के बारे में सम्पूर्ण जानकारी

एकादशी क्या है?

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एकादशी हिन्दू पंचांग में प्रत्येक पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है। यह महीने में दो बार आती है - एक शुक्ल पक्ष (चंद्रमा बढ़ते समय) में और एक कृष्ण पक्ष (चंद्रमा घटते समय) में।

'एकादशी' शब्द संस्कृत से है: 'एक' अर्थात एक और 'दशी' अर्थात दस, मिलकर ग्यारह

🙏 यह हिन्दुओं के लिए सबसे पवित्र दिनों में से एक माना जाता है, विशेषकर भगवान विष्णु के भक्तों के लिए।

एकादशी व्रत से:

  • मन और शरीर शुद्ध होता है
  • पिछले कर्म जलते हैं
  • मोक्ष की प्राप्ति होती है
  • आध्यात्मिक उन्नति होती है

एकादशी व्रत कैसे करें?

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एकादशी व्रत सही तरीके से करने के लिए इन नियमों का पालन करें:

  1. व्रत प्रारंभ: एकादशी के दिन सूर्योदय से व्रत शुरू करें
  2. व्रत समाप्ति: द्वादशी (12वें दिन) के सूर्योदय के बाद पारण समय में व्रत खोलें
  3. भोजन नियम: सभी अनाज, दाल, चावल, गेहूं से बचें
  4. दिनचर्या: प्रार्थना, ध्यान, शास्त्र पढ़ने और विष्णु नाम जप में समय बिताएं
  5. जागरण: कई भक्त रात भर जागकर भजन-कीर्तन करते हैं

📿 पारण (व्रत खोलना): द्वादशी की सुबह निर्धारित समय पर पहले भगवान को भोग लगाएं, फिर प्रसाद ग्रहण करें।

एकादशी में क्या खा सकते हैं?

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एकादशी व्रत में निम्नलिखित भोजन की अनुमति है:

✅ खा सकते हैं

  • 🍌 सभी ताजे फल
  • 🥛 दूध, दही, पनीर, घी
  • 🥜 बादाम, काजू, मूंगफली
  • 🥔 आलू, शकरकंद, कद्दू
  • 🌾 कुट्टू, सिंघाड़ा आटा
  • 🧂 सेंधा नमक

❌ वर्जित हैं

  • 🍚 चावल, गेहूं, जौ
  • 🫘 दाल, छोले, राजमा
  • 🧅 प्याज, लहसुन
  • 🍄 मशरूम
  • 🧂 सामान्य नमक
  • 🍖 मांसाहार

निर्जला एकादशी क्या है?

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निर्जला एकादशी, जिसे भीम एकादशी या पांडव एकादशी भी कहते हैं, सबसे शक्तिशाली और कठोर एकादशी है।

📅 2026 में निर्जला एकादशी 25 जून को है।

'निर्जला' का अर्थ है 'बिना पानी' - भक्त 24+ घंटे बिना भोजन और पानी के व्रत रखते हैं।

ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार, इस एक एकादशी को करने से साल की सभी 24 एकादशियों का पुण्य मिलता है।

कथा के अनुसार, पांडव भीम अपनी भूख के कारण नियमित व्रत नहीं रख पाते थे, तो व्यास मुनि ने उन्हें केवल यही एक एकादशी रखने की सलाह दी।

⚠️ इसकी कठोरता के कारण, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों या स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों के लिए यह व्रत अनुशंसित नहीं है।

एकादशी में पानी पी सकते हैं?

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हां, अधिकांश एकादशी व्रत में पानी पी सकते हैं। एकादशी व्रत के विभिन्न स्तर हैं:

  • निर्जला व्रत: सबसे कठोर - बिना भोजन और पानी। मुख्यतः निर्जला एकादशी (जून) में।
  • फलाहार व्रत: फल, दूध और पानी की अनुमति। सबसे आम।
  • एकाहार व्रत: केवल अनाज वर्जित, अन्य भोजन और पानी।

💧 शुरुआती या स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों के लिए पानी और फल लेना बिल्कुल स्वीकार्य है। भक्ति का भाव कठोरता से अधिक महत्वपूर्ण है।

साल में कितनी एकादशी होती हैं?

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एक साल में आमतौर पर 24 एकादशी होती हैं - हर चंद्र माह में दो (एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में)।

कुछ वर्षों में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) होने पर 26 एकादशी हो सकती हैं।

2026 की 24 एकादशी:

सफला, पौष पुत्रदा, षट्तिला, जया, विजया, आमलकी, पापमोचनी, कामदा, वरूथिनी, मोहिनी, अपरा, निर्जला, योगिनी, देवशयनी, कामिका, श्रावण पुत्रदा, अजा, पार्श्व, इंदिरा, पापांकुशा, रमा, देवउत्थान, उत्पन्ना, और मोक्षदा

⭐ निर्जला, देवशयनी, देवउत्थान, और मोक्षदा एकादशी विशेष रूप से शक्तिशाली मानी जाती हैं।

एकादशी का क्या महत्व है?

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एकादशी का आध्यात्मिक, शारीरिक और खगोलीय महत्व है:

  • आध्यात्मिक लाभ: व्रत से मन शुद्ध होता है, भौतिक आसक्ति कम होती है, और भगवान विष्णु से निकटता बढ़ती है। पिछले कर्म जलते हैं और मोक्ष की ओर प्रगति होती है।
  • शारीरिक लाभ: समय-समय पर उपवास से पाचन तंत्र को आराम मिलता है, शरीर से विषाक्त पदार्थ निकलते हैं, और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।
  • खगोलीय महत्व: चंद्रमा पृथ्वी के जल को प्रभावित करता है। एकादशी पर चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण व्रत के लिए अनुकूल होता है।

📖 पद्म पुराण के अनुसार भगवान विष्णु स्वयं एकादशी तिथि में निवास करते हैं। भागवत पुराण इसे 'भक्ति की माता' कहता है।

गर्भवती महिलाएं एकादशी व्रत कर सकती हैं?

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हिन्दू शास्त्रों के अनुसार गर्भवती महिलाओं को कठोर एकादशी व्रत से छूट है। लेकिन वे संशोधित तरीके से व्रत कर सकती हैं:

🤰 अनुशंसित: गर्भवती महिलाएं फल, दूध, मेवे और हल्के सात्विक भोजन लेकर आंशिक व्रत कर सकती हैं। पूर्ण उपवास उचित नहीं है क्योंकि इससे शिशु के विकास पर प्रभाव पड़ सकता है।

धर्म शास्त्र के अनुसार निम्नलिखित लोग कठोर व्रत से मुक्त हैं:

  • गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं
  • बुजुर्ग
  • 8 वर्ष से कम उम्र के बच्चे
  • गंभीर रोगी
  • आवश्यक दवाइयां लेने वाले

वैकल्पिक उपाय: अधिक समय प्रार्थना में बिताएं, विष्णु सहस्रनाम सुनें, अनाज छोड़कर अन्य भोजन लें।

🙏 सिद्धांत: भक्ति का भाव शारीरिक कठोरता से अधिक महत्वपूर्ण है। भगवान विष्णु आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले नियमों की तुलना में सच्ची भक्ति की अधिक सराहना करते हैं।